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Showing posts from June, 2009

लहरों से डराकर नौका पार नहीं होती ,कोशीश कराने वालों की हार नहीं होती

लहरों से डराकर नौका पार नहीं होती ,
कोशीश कराने वालों की हार नहीं होती

नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है ,
चढ़ती दीवारों पर , सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है ,
चढ़कर गिरना , गिरकर चढ़ना ना अखरता है ।
आखीर उसकी म्हणत बेकार नहीं होती ,
कोशीश करने वालों की हार नहीं होती

दुब्कियाँ सिंधु में गोताखोर लगता है ,
जा जा कर खली हाथ लौटकर आता है
मिलते नही सहज ही मोती गहरे पानी में ,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।
मुठी उसकी खली हर बार नहीं होती ,
कोशीश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है , इसे स्वीकार करो ,
क्या कमी रह गयी , देखो और सुधर करो ।

जब तक ना सफल हो , नींद चेन को त्यागो तुम ,
संघर्ष का मैदान छोड़कर मत भागो तुम .
कुछ किये बिना ही जय जेकर नहीं होती ,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ।
कोशीश करने वालों की हार नहीं होती